26 जनवरी का दिन तो आया, तिरंगा भी लहराया,
पर क्या हर दिल ने संविधान को सच में अपनाया?
कानून लिखे हैं किताबों में, पर आचरण में कहाँ,
न्याय की बातें होंठों पर हैं, कर्मों में दिखती कहाँ।
संविधान ने सबको समान कहा, फिर भेद क्यों फैलता है?
अधिकार तो सबको चाहिए, कर्तव्य कौन निभाता है?
सड़कों पर नारे गूँजते हैं, सम्मान वहीं रुक जाता है,
जब नियम पालन की बारी आए, तब मौन छा जाता है।
शहीदों ने जो सपना देखा, वो कागज़ न बन जाए,
संविधान तभी जीवित होगा, जब जन-जन उसे अपनाए।
26 जनवरी सिर्फ पर्व नहीं, एक चेतावनी है,
संविधान बचेगा तभी, जब जनता ईमानदार बने।
